Kedarnath Ropeway अब 29 साल तक Adani के कब्जे में

kedarnath ropeway project

Adani Group पर उठे गंभीर सवाल

सरकार और NHLML ने हाल ही में Kedarnath Ropeway Project का ठेका Adani Group को सौंप दिया है। लेकिन इस फैसले के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि Adani Group के पास Ropeway का कोई अनुभव नहीं है, फिर भी उन्हें इतना बड़ा और संवेदनशील प्रोजेक्ट कैसे दे दिया गया?


Kedarnath Ropeway Project – क्या है योजना?

Kedarnath Ropeway Project
  • लंबाई: 12.9 किमी (देश का सबसे लंबा Ropeway बनने की तैयारी)
  • कुल लागत: ₹4,081 करोड़
  • यात्रा समय: 8–9 घंटे से घटकर सिर्फ 36 मिनट
  • यात्री क्षमता: 1,800 यात्री प्रति घंटा
  • निर्माण अवधि: 6 साल
  • संचालन अधिकार: Adani Group को 29 साल के लिए दिए गए

Adani Group का अनुभव शून्य – फिर भी मिला ठेका

Adani Group बंदरगाह, एयरपोर्ट और हाईवे प्रोजेक्ट में जरूर बड़ा नाम है। लेकिन Ropeway जैसे हाई-टेक्निकल प्रोजेक्ट में उनका कोई अनुभव नहीं है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बैठक में कहा था कि ऐसे प्रोजेक्ट केवल अनुभवी कंपनियों को दिए जाएंगे। लेकिन Kedarnath Ropeway Project का ठेका Adani Group को मिलना इस बयान को कटघरे में खड़ा करता है।

क्या सरकार ने अपनी ही शर्तों से समझौता किया?


Kedarnath Ropeway Project से पर्यावरणीय खतरे

Kedarnath Ropeway Project

केदारनाथ एक eco-sensitive zone है। यहाँ किसी भी तरह का भारी निर्माण सीधे पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी को प्रभावित करेगा।

संभावित खतरे:

  • बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई
  • भूस्खलन (Landslide) की आशंका
  • नदियों और ग्लेशियर पर असर
  • वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास खत्म होना

2013 की त्रासदी अब भी लोगों की यादों में ताजा है। ऐसे में Kedarnath Ropeway Project जैसे भारी निर्माण से आने वाले समय में और भी बड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।


Kedarnath Ropeway Project और स्थानीय रोजगार पर असर

आज हजारों स्थानीय लोग घोड़े-खच्चर, पालकी और पिट्ठू सेवा से रोज़गार कमा रहे हैं।

Adani Group द्वारा Kedarnath Ropeway Project बनने के बाद:

  • इन पारंपरिक सेवाओं का अस्तित्व लगभग खत्म हो जाएगा।
  • हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट आएगा।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

सरकार ने इनके पुनर्वास या वैकल्पिक रोजगार पर कोई ठोस योजना नहीं दी है।


Adani Group को मिलने वाले फायदे

Adani Group के लिए यह प्रोजेक्ट सोने की खान साबित होगा।

  • टिकट बिक्री से हर साल करोड़ों की कमाई।
  • 29 साल तक संचालन का अधिकार।
  • पार्किंग, होटल टाई-अप, विज्ञापन और अतिरिक्त सेवाओं से और आमदनी।
  • धार्मिक महत्व वाली जगह पर प्रोजेक्ट मिलने से कंपनी की ब्रांड वैल्यू और भी मजबूत होगी।

यानि फायदा सिर्फ Adani Group को और नुकसान स्थानीय लोगों तथा पर्यावरण को।

NHLML पर भी उठ रहे सवाल

Kedarnath Ropeway Project का जिम्मा NHLML (National Highways Logistics Management Limited) को दिया गया है। यह कंपनी सीधे NHAI (National Highways Authority of India) के तहत काम करती है। लेकिन NHAI का ट्रैक रिकॉर्ड किसी से छुपा नहीं है।

हम सबने देखा है कि देशभर में NHAI द्वारा बनाए गए हाईवे और सड़कें कुछ ही सालों में टूट-फूट जाती हैं। जगह-जगह गड्ढे, खराब क्वालिटी और जल्दी खराब होने वाले निर्माण की वजह से अक्सर हादसे भी होते हैं। अगर सड़क जैसी बेसिक चीज़ें ही लंबे समय तक टिकाऊ नहीं बन पातीं, तो सवाल उठना लाज़मी है कि NHLML जैसी एजेंसी Adani Group को मिलकर Kedarnath Ropeway Project जैसे संवेदनशील और तकनीकी प्रोजेक्ट को कितनी गंभीरता से संभाल पाएगी?


Kedarnath Ropeway Project पर जनता की राय

  • समर्थक: यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
  • विरोधी: स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् मानते हैं कि यह प्रोजेक्ट प्राकृतिक संतुलन और रोजगार दोनों को नष्ट कर देगा।
  • धार्मिक चिंता: साधु-संत मानते हैं कि धाम की पवित्रता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

आपदा का बड़ा खतरा

अगर भविष्य में फिर कोई प्रलय आती है तो Kedarnath Ropeway Project सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।

  • टावर और केबल टूट सकते हैं।
  • यात्रियों की जान पर खतरा होगा।
  • सरकार और कंपनी दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

Adani Group पर क्यों उठ रहे सवाल?

Kedarnath Ropeway Project

Kedarnath Ropeway Project देखने में भले ही श्रद्धालुओं के लिए वरदान लगे, लेकिन इसके पीछे कई गंभीर खतरे छिपे हैं।

  1. Adani Group के पास Ropeway का कोई अनुभव नहीं।
  2. सरकार ने “अनुभवी कंपनियों” वाली शर्त को नज़रअंदाज़ किया।
  3. परियोजना से पर्यावरण, रोजगार और धार्मिक पवित्रता पर नकारात्मक असर होगा।
  4. असली फायदा केवल Adani Group को मिलेगा, घाटा स्थानीय लोगों और प्रकृति को।

Adani Group को बिना अनुभव के इतना बड़ा और संवेदनशील प्रोजेक्ट देने का फैसला कहीं न कहीं सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

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