देहरादून। निरंजनपुर मंडी के पास ब्राह्मणवाला क्षेत्र की रोचीपुरा कॉलोनी की मुख्य सड़क पर लोक निर्माण विभाग (PWD) Dehradun ने हाल ही में मरम्मत कार्य कराया। लेकिन विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि सड़क सिर्फ 6 घंटे में ही टूट गई।
मौत के गड्ढों से परेशान लोग
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर पहले से ही “मौत के गड्ढे” मौजूद थे। मरम्मत उस समय की गई जब इलाके में अगले दिन एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होना था। दबाव में पीडब्ल्यूडी (PWD) ने रातोंरात सड़क बनाई, लेकिन घटिया निर्माण की वजह से सड़क कुछ ही घंटों में उखड़ गई।
लोगों का कहना है कि सड़क किनारे एक खतरनाक गड्ढा अभी भी मौजूद है, जिस पर कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
शिकायत और विभागीय लापरवाही
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई थी, जहाँ आश्वासन दिया गया कि 15 दिन में समस्या का समाधान किया जाएगा। लेकिन लगभग एक महीने बाद जो जवाब मिला, उसमें यह मामला नगर निगम का न होकर PWD Dehradun का बताया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारी तय करने की बजाय अधिकारी शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहे हैं। आमतौर पर हादसा होने के बाद ही पुलिस सक्रिय होती है और तब भी सीसीटीवी फुटेज पूरी तरह उपलब्ध नहीं होती।
PWD Dehradun की सड़क 6 घंटे भी क्यों नहीं टिक पाई?

स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सड़क बनने के कुछ ही घंटों में टूट कैसे गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे आम तौर पर ये कारण होते हैं:
- घटिया मटेरियल का इस्तेमाल – कॉन्ट्रैक्टर लागत बचाने के लिए अच्छे क्वालिटी का डामर और मटेरियल नहीं लगाते। नतीजा यह होता है कि सड़क थोड़े दबाव या बरसात में तुरंत बैठ जाती है।
- सही लेवलिंग और रोलिंग न होना – सड़क बनाने से पहले बेस की लेवलिंग और रोलिंग मशीन से दबाना जरूरी होता है। अगर यह प्रक्रिया अधूरी रह जाए, तो ऊपर की परत टिकती ही नहीं।
- पानी की निकासी की व्यवस्था न होना – सड़कों पर पानी रुकने से डामर और गिट्टी जल्दी उखड़ जाते हैं। बारिश या पानी का रिसाव होने पर गड्ढे तुरंत बनने लगते हैं।
- जल्दीबाज़ी में काम पूरा करना – अक्सर उद्घाटन, वीआईपी विज़िट या कार्यक्रम से पहले काम दिखाने के लिए रातों-रात सड़क बनाई जाती है। ऐसी जल्दबाज़ी में तकनीकी मानकों की अनदेखी हो जाती है और सड़क टिकाऊ नहीं बन पाती।
विभागीय तालमेल की कमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में विभागीय तालमेल की भारी कमी साफ दिखती है।
शिकायत सीधे PWD से जुड़ी थी, लेकिन नगर निगम ने इसे अपनी श्रेणी में डाल दिया।
करीब एक महीने तक नगर निगम सिर्फ यह बताने में लगा रहा कि मामला उसका नहीं बल्कि PWD का है।
अगर समय पर शिकायत को सही विभाग यानी PWD को फॉरवर्ड कर दिया जाता, तो शायद मरम्मत का काम तुरंत शुरू हो जाता और लोगों को राहत मिल जाती।
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