शामली के लोगों पर NHAI ने लगाए आरोप, कहा- ड्रेनेज कार्य रोकने से धंसा एक्सप्रेसवे
देश की महत्वाकांक्षी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना का एक हिस्सा उत्तर प्रदेश के शामली के पास धंस गया। सड़क पर बड़ी दरारें आने के बाद प्रभावित हिस्से पर यातायात रोक दिया गया और मरम्मत का काम शुरू किया गया।
इस घटना ने करोड़ों रुपये की लागत से बने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता, सरकारी निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NHAI ने स्थानीय लोगों को बताया वजह
घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा ड्रेनेज कार्य में बाधा डालने से पानी का जमाव हुआ, जिससे सड़क की संरचना प्रभावित हुई।
हालांकि, कई लोगों का सवाल है कि यदि जल निकासी इतनी महत्वपूर्ण थी, तो परियोजना के दौरान उसका स्थायी समाधान पहले से क्यों नहीं किया गया? क्या इतनी बड़ी राष्ट्रीय परियोजना में संभावित जोखिमों का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया था?
क्या निर्माण में हुई लापरवाही?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आधुनिक एक्सप्रेसवे में मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और मिट्टी की स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में शुरुआती दौर में ही सड़क का धंसना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक धंसने के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं की जा सकती।
लोगों में नाराजगी, सरकार से जवाब की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर सरकार तथा संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि नई सड़क इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाए, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे स्पष्ट होगा कि यह घटना निर्माण संबंधी कमी, ड्रेनेज समस्या या किसी अन्य कारण से हुई।
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